राष्ट्रगीत |
संगीतः घनश्याम ठक्कर |
August 14, 2010
स्वातंत्र्यदिन मुबारक (राष्ट्रगीत) – संगीतः घनश्याम ठक्कर
July 25, 2010
યુ-ટ્યુબ : કાવ્યપઠન, આસ્વાદ અને નિવેદન [વિડિયો-૧] -
યુ-ટ્યુબ : કાવ્યપઠન, આસ્વાદ અને નિવેદન [વિડિયો-૧] -
ઘનશ્યામ ઠક્કર
You Tube Kavya Pathan, Asvad, and Nivedan
Ghanshyam Thakkar
Poem: Bhoori ShahiNa Kuva Kanthe, Book: Bhoori ShahiNa Kuva Kanthe, Poet: Ghanshyam Thakkar,
July 8, 2010
July 2, 2010
June 20, 2010
Oasis Goes To White House [PART-2] – (You Tube Video) Music &Comedy: Oasis Thacker
Oasis Goes To White House [PART-2]
(You Tube Video)
Music & Comedy
Oasis Thacker
In part –1 you saw how Oasis made his way to the White House State Dinner in honor of India’s Prime Minister Singh. In this segment he tries to socialize with two very famous music personalities, A.R.Rahman, and Jennifer Hudson. While trying to be nice to both of his favorite music stars; Oasis is not able to hide his jealousy. He also shows of his music number, because this is his fantasy.
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If you missed the Part-1, Click below.
Oasis Goes to White House Part-1
(You Tube Comedy Video)
Ghanshyam Thakkar (Oasis Thacker)
March 12, 2010
दीपावलीके त्योहारोंकी शुभकामनाएं – घनश्याम ठक्कर
ओ रंग-रसिया (डांडिया रास) – संगीतः घनश्याम ठक्कर
आलबमः ओ राज रे
गीतः लोकगीत
संगीतः घनश्याम ठक्कर
स्वरः किशोर मनराजा, दमयंती बरडाई, और साथी
डांडिया रास
Dandiya Raas
Ghanshyam Thakkar
प्यारे दोस्तो
इस लोकगीतमें बात है दो प्रेमी, (पति-पत्नि)की. नवरात्रीका समय है, और पतिदेव पूरी रात घर नहीं आते है. देवीजी को यह संशय है कि उसका बांका छैला कुछ कंवारी छैलियोंके साथ रातभर डांडिया-रास खेलकर आया है! सुबहमें प्रियतम घर आते हैं तो स्पष्टतः प्रियतमाको कुछ प्रश्न है. लेकीन वह डंडा ले कर पुलिसकी तरह नहीं पूछती है, “Where the hell have you been all night, you son of a squirrel?” उसके बदलेमे प्यारे प्रोसीक्युटरकी तरह ‘रंगरसिया’ जैसा रंगीला संबोधन लगाकर पूछती है, “ओ.. रंगर्सिया, कहां गया था रातभर रास खेलनेको? ये जागरणसे भरी लाल अंखियां क्युं?” लेकिन प्रियतमभी बेवकुफ नहीं है, एक चालाक डिफेंडेंटकी तरह जेबमेंसे सोनेके पैंजनेकी जोड निकालके कहता है, ‘अरे पगली, मैतो देर रात तक सुनारके यहां था, तेरे लिये ये कस्टम-मेइड झांझर बनवानेमें कमबख्त सुबहा हो गई.” लेकिन प्रोसिक्युटर प्रियतमाको अभी ऐतबार नही होता है. वह फिरसे यही प्रश्न पूछती है. पतिदेव दूसरी जेबमेंसे चूडियां निकालकर कहता है, ” अरी, मैं तो चूडियां बनानेवालेके यहां भी गया था. इतनी सुंदर चूडियां बनानेमें सुबह हो गई!!”
मेरे ब्लोगके महार्थक मेहमान! अब फैंसला आपके हाथमें है. कॉमेंट विभागमें जवाब लिखिये किः
१. क्या ये प्रियतम सच कह रहा है, कि उसने पूरी रात पत्नीके लिये गहने बनवानेके लिये बितायी?
२. या वह सचमुच गोरीयोंके साथ रास खेलने गया था, और बहाने + रिश्वतके लिये गहने पहलेसे बनवाकर रख्खे थे?
कोमेंट विभागमें जवाब लिखिये.
घनश्याम ठक्कर
ओ राज रे (हीच – गरबा) – संगीतः: घनश्याम ठक्कर
संगीतः: घनश्याम ठक्कर
गीतः लोकगीत और घनश्याम ठक्कर





