कविवर रबीन्द्रनाथ टैगोर के जन्मदिवस पर [चल तू अकेला – भावानुवादः घनश्याम ठक्कर (ओएसीस)]

(तबे एकला चलो रे।)
(गीत)

रबीन्द्रनाथ टैगोर

बंगाली-गुजराती भाषांतर : महादेवभाई देसाई

मूल बंगाली गीत

यदि तोर डाक शुने केऊ न आसे

तबे एकला चलो रे।

एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो रे!
यदि केऊ कथा ना कोय, ओरे, ओरे, ओ अभागा,
यदि सबाई थाके मुख फिराय, सबाई करे भय-
तबे परान खुले
ओ, तुई मुख फूटे तोर मनेर कथा एकला बोलो रे!

यदि सबाई फिरे जाय, ओरे, ओरे, ओ अभागा,
यदि गहन पथे जाबार काले केऊ फिरे न जाय-
तबे पथेर काँटा
ओ, तुई रक्तमाला चरन तले एकला दलो रे!

यदि आलो ना घरे, ओरे, ओरे, ओ अभागा-
यदि झड़ बादले आधार राते दुयार देय धरे-
तबे वज्रानले
आपुन बुकेर पांजर जालियेनिये एकला जलो रे!

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