आवाझ दे के हमें तुम बुलाओ (वाद्य रिमिक्स ) घनश्याम ठक्कर (ओएसीस) Ghanshyam Thakkar (Oasis)

See this post in English

आवाझ दे के हमें तुम बुलाओ

(वाद्य रिमिक्स )Play mp3

Computer Art: Ghanshyam Thakkar (Oasis)

Computer Art: Ghanshyam Thakkar (Oasis)

घनश्याम ठक्कर (ओएसीस)

Ghanshyam Thakkar (Oasis)

 

आवाझ दे के हमें तुम बुलाओ (वाद्य रिमिक्स ) घनश्याम ठक्कर (ओएसीस)

यह प्रेम-गीत १९६२ हिन्दी फिल्म ‘प्रोफेसर’ का है. शंकर-जयकिसन ने उसकी मधुर धुन बनाई है. मोहोम्मद रफी और लता मंगेशकर ने गीत को सुंदर भाव दे कर गाया है.

प्रेमगीत के कई प्रकार होते हैं. दो प्रेमी एक दूसरे के साहचर्य में एक दूसरे की सराहना करे, प्रेमी प्रेमिका के सौंदर्य की प्रशंसा करे, वह एक प्रकार है. जैसे की   Rut Ye Suhani , कुच प्रेमगीत शरारती होते हैं जैसे की Gulshan ke Madari. यौन आवेग के गीत में प्रेमी के प्रेम के साथ शारिरिक आकर्षण का असर होता है. जैसे की  Behkaye Ja – बहकाये जा. लेकिन कुछ प्रेमगीत में दर्द होता है. यह विरह का दर्द नहीं है. इसमें जमाने की रुकावट भी नहीं होती है. अंतर या समय की दूरी भी नहीं होती है. लेकिन प्रेम का असर इतना तीव्र है, कि प्रेमी एक दूसरे के नजदिक होने पर भी प्रेम के मीठे दर्द की अनुभूति होती है. (मानव भावावेश बहुत जटिल है. कभी कभी, जब अत्यंत खुशी होती है, तब हम हंसने के बदले में रो पडते है )

जब यह गीत रिलिझ हुआ तब मैं १६ साल का था. इस उम्रमें भावावेश कितने तीव्र होते है? मैंने जब यह गाना सुना, तब वह मेरे दिल के आर-पार कर गया. मैं कोई अनजान लडकी के प्यार के सपने में खो गया.

जब संगीतकार गीत की धून बनाता है, तो सबसे पहले गीत के भाव की अनुभूति करता है. फिर उस की तर्ज बनती है. संगीत की तर्ज में गायक और वाजिन्त्र के संदर्भ में अरेन्जमेंट होती है. कौन से गायक की आवाझ गीत के लिये माकूल है यह तय किया जाता है. कौनसे वाजिन्त्र गीत के भाव के लिये उचित है, और कोनसे वादक यह तय वाजिंत्र बजाने के लिये योग्य है वह भी तय किया जाता है. कभी संगीतकार खुद य निर्णय लेता है, तो कभी वह ओर्केस्ट्रा अरेन्जर की सलाह लेता है. गीतकार गीत के भाव के उचित गीत लिखता है.  कुछ समय पहले गीत के शब्द पहले लिखे जाते थे, उस के बाद तर्ज बनती थी. अब बहुधा उल्टा क्रम है.

लता मंगेशकर और महंमद रफी ने इस गीत को बहुत सुंदर गाया है.  ऑर्केस्ट्रा भी बहुत अच्छी है. जबसे मैंने यह गीत सुना है, सोप्रानो सेक्सोफोन जिस तरह बजा है, मेरे दिल में घर कर गया है.  आमतौर पर वादक को इतना  श्रेय नहीं मिलता है, जितना मिलना चाहिए. हम इस सेक्सोफोनिस्ट का नाम भी   नहीं जानते है, लेकिन गीत के भाव के लिये उन का बडा योगदान है. मुझे सोप्रनो सेक्सोफोन सीखने की बहुत तमन्ना थी, लेकिन कभी समय नहींं मिला. जब मैने १९९५ में मेरा सिन्थ्साइझर खरीदा, तब उस के वाजिन्त्रोमें सोप्रानो सेक्सोफोन भी था. मैं आनंद-विभोर हो गया. वैसे तो वाजिन्त्र अच्छा है, लेकिन इस गीत के सोप्रानो में जैसे भाव आते है, ऐसे भाव नहीं ला सकता था. मेरे सिन्थेसाइझर में तुम नये वाजिन्त्र प्रोग्राम कर सकते हो. पूरे एक महीने की मेहनत के बाद मैंने तीन चार नये सेक्सोफोन बनाये, जो आप सुनेंगे. मैंने मेरे आलबमों में इन सेक्सोफोन का बहुत उपयोग किया है वह तो आप जानते है, लेकिन जिस गीतने सेक्सोफोन बनाने की प्रेरणा दी वह गीत रेकोर्ड करने के लिये अब तक समय नहीं मिला था. आज पहलीबार उस गाने को आप सुनोगे. आशा है कि गायक, सेक्सोफोन वादक और वादक ने जो भाव पैदा किये है, उन्हें मैं अच्छा न्याय दे सका हूं.

यह फिल्म का गीत है. एक्टर गीत के भाव गे अनुरुप फिल्म में अभिनय करते हैं. ‘प्रोफेसर’ रोमेंटिक कॉमेडी थी. और फिल्म के हिरो, शम्मी कपूर अपनी उछल कूद के लिये प्रसिध्ध थे. कोई उनके पास से प्रेम के ऐसे जटिल भाव को इतनी गहराई से निभाने की अपेक्षा नहीं रखते थे. लेकिन उन्होंने सच्चे प्रेम का दर्द जो अपने चहरे पे प्रदर्शित किया है, वह सराहने के योग्य है.

 

 

About Ghanshyam Thakkar

Music Composer, Music Arranger, Music Producer, Poet, Lyricist, Blog Editor, Audio Recording and Mixing Artist, Web-page Design Artist, Electrical Engineer(B.E.), Project Manager
This entry was posted in Uncategorized. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *