

|
|||||||
|
|||||||
| |||||||
|
कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
|||||||
|
कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती काव्यसंग्रह |
|||||||
|
कवि घनश्याम ठक्कर गुजराती सीडी काव्यसंग्रह |
|
Music * Poetry * Literature * Comedy * Entertainment * Performing Arts |
संगीत़़ * कविता * साहित्य * हास्य * मनोरंजन |
मेरी मटकीसेगीतघनश्याम ठक्करमेरी मटकी से जमुना बहा दुंगी श्याम! मेरे आंगन में रास जो रचाएं
कोई कहे पायल की नफ्फट बाजार है ये, कोई कहे ये मेरा गांव, कैसे चलुं कि मेरी खाली है जेब, और पायल बिन भारी है पांव!
मेरे पांवो में घुंघरुं बंधवादे तो श्याम! सारी नगरी को थनथन नचाएं मेरी मटकी से जमुना बहा दुंगी श्याम! मेरे आंगन में रास जो रचाएं
वृंदावन क्या? मेरे बाग में तो आते हैं घास के भी सपने अब पीले, गोकुल की मिट्टी का करदे गुलाल, ऐसे लाल लाल चेहरे रसीले.
मेरी सांसो में कोयल कुहका दुंगी श्याम! मेरे कानमें जो बांसुरी बजाये. मेरी मटकी से जमुना बहा दुंगी श्याम! मेरे आंगन में रास जो रचाएं Posted by Ghanshyam Thakkar
|
----------------- |
राधाकी व्यथा (गीत) - घनश्याम ठक्कर

पर-घर |
Computer-Art: Ghanshyam Thakkar |
Email to: oasisangeet@yahoo.com |
copyrights: Oasis Thacker |